Mating In Snakes : जानिए कैसे होता है सांपों का मिलन, कैसे बनाते हैं जोड़ा
Mating In Snakes : जानिए कैसे होता है सांपों का मिलन, कैसे बनाते हैं जोड़ा
Mating in snakes in Hindi : सांप एक ऐसा जीव है जो सदियों से मनुष्य के लिए शोध का विषय रहा है। इसके आवास, भोजन, चलने का तरीका, विष आदि विषय के बारे में आसानी से जानकारी मिल जाती है लेकिन इसके समागम और संतति के बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं। आज हम आपको सांपों के समागम और संतति के बारे में बताएंगे-

सांप जैसे जीवों में जोड़ा बनाना और समागम करना एक नर और मादा सांप के मिलन की घटना मात्र नहीं है बल्कि यह एक अधिक जटिल मामला है जो कुछ निश्चित विधि-विधानों पर निर्भर होकर सांपों की जनसंख्या संबंधी व्यवहार को अभिव्यक्त करता है।
प्रजनन ऋतु के दौरान नर सांप अक्सर अधिक सक्रिय रहते हैं और मादा सांप को ढूंढते फिरते हैं। मादा पर अपना हक जताने के लिए कई बार नर सांपों के बीच युद्ध भी होता है। कई बार इस लड़ाई में एक सांप की मौत भी हो जाती है।
प्रजनन काल के दौरान नर सांप सतर्क, बदमिजाज और चिड़चिड़े होते हैं तथा इस विशेष अवसर के पूर्व अपनी केंचुली उतारकर वे सजीव व चुस्त बन जाते हैं।

दूसरी ओर मादा सांप शांत और सौम्य व्यवहार का प्रदर्शन करती है जब तक कि कोई नर सांप उस तक नहीं पहुंचता। उपयुक्त नर के मिलने पर मादा सांप उसे समागम के लिए स्वीकृति प्रदान करती है। सांपों के मिलन की यह क्रिया देखना अपने आप में एक आश्चर्यचकित घटना होती है।
मिलन के समय नर और मादा सांप को देखकर ऐसा लगता है, मानो वे दो नहीं एक ही हों। जैसे-जैसे मादा चलती है वैसे-वैसे ही नर उसका अनुसरण करता है। इस क्रिया के दौरान नर और मादा सांप धरती से कई फीट ऊपर भी उठ जाते हैं।
अधिकांश सांप वर्षा ऋतु के लगभग दो महीने पहले समागम करते हैं। प्रत्येक प्रजाति के नर सांप केवल अपनी नस्ल की मादा सांप के साथ ही जोड़ा बनाते हैं। धामन और अजगर प्रजाति के सर्प साल में एक बार तथा फुरसा, भेडिय़ा और सीता की लट प्रजाति के सर्प साल में दो बार प्रजनन करते हैं।
नर और मादा सांपों में दुम के पास प्रजनन अंग होते हैं। नर सांपों के दो अद्र्ध शिशन गुदा द्वारों में छिपे होते हैं, पूंछ के निचले हिस्से को दबाने और रगडऩे से गुदाद्वार के दोनों सिरों से अद्र्ध शिश्न बाहर निकल आते हैं। जिन सांपों में पूंछ के निचले हिस्से को रगडऩे पर ऐसा नहीं होता है वे मादा सांप होते हैं।
नर और मादा सांपों की दुम के मूल में मौजूद गुदा द्वार पर कस्तूरी ग्रंथियां होती हैं। हर जाति के सांप की कस्तूरी ग्रंथियों में अलग-अलग गंध होती हैं। प्रजनन काल के दौरान माता सांप अपनी कस्तूरी ग्रंथि से गंध छोड़ती है, जिससे नर उसका पीछा करता है और उसे ढूँढ लेता है।
Mating In Snakes : जानिए कैसे होता है सांपों का मिलन, कैसे बनाते हैं जोड़ा
Mating in snakes in Hindi : सांप एक ऐसा जीव है जो सदियों से मनुष्य के लिए शोध का विषय रहा है। इसके आवास, भोजन, चलने का तरीका, विष आदि विषय के बारे में आसानी से जानकारी मिल जाती है लेकिन इसके समागम और संतति के बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं। आज हम आपको सांपों के समागम और संतति के बारे में बताएंगे-

सांप जैसे जीवों में जोड़ा बनाना और समागम करना एक नर और मादा सांप के मिलन की घटना मात्र नहीं है बल्कि यह एक अधिक जटिल मामला है जो कुछ निश्चित विधि-विधानों पर निर्भर होकर सांपों की जनसंख्या संबंधी व्यवहार को अभिव्यक्त करता है।
प्रजनन ऋतु के दौरान नर सांप अक्सर अधिक सक्रिय रहते हैं और मादा सांप को ढूंढते फिरते हैं। मादा पर अपना हक जताने के लिए कई बार नर सांपों के बीच युद्ध भी होता है। कई बार इस लड़ाई में एक सांप की मौत भी हो जाती है।
प्रजनन काल के दौरान नर सांप सतर्क, बदमिजाज और चिड़चिड़े होते हैं तथा इस विशेष अवसर के पूर्व अपनी केंचुली उतारकर वे सजीव व चुस्त बन जाते हैं।

दूसरी ओर मादा सांप शांत और सौम्य व्यवहार का प्रदर्शन करती है जब तक कि कोई नर सांप उस तक नहीं पहुंचता। उपयुक्त नर के मिलने पर मादा सांप उसे समागम के लिए स्वीकृति प्रदान करती है। सांपों के मिलन की यह क्रिया देखना अपने आप में एक आश्चर्यचकित घटना होती है।
मिलन के समय नर और मादा सांप को देखकर ऐसा लगता है, मानो वे दो नहीं एक ही हों। जैसे-जैसे मादा चलती है वैसे-वैसे ही नर उसका अनुसरण करता है। इस क्रिया के दौरान नर और मादा सांप धरती से कई फीट ऊपर भी उठ जाते हैं।
अधिकांश सांप वर्षा ऋतु के लगभग दो महीने पहले समागम करते हैं। प्रत्येक प्रजाति के नर सांप केवल अपनी नस्ल की मादा सांप के साथ ही जोड़ा बनाते हैं। धामन और अजगर प्रजाति के सर्प साल में एक बार तथा फुरसा, भेडिय़ा और सीता की लट प्रजाति के सर्प साल में दो बार प्रजनन करते हैं।
नर और मादा सांपों में दुम के पास प्रजनन अंग होते हैं। नर सांपों के दो अद्र्ध शिशन गुदा द्वारों में छिपे होते हैं, पूंछ के निचले हिस्से को दबाने और रगडऩे से गुदाद्वार के दोनों सिरों से अद्र्ध शिश्न बाहर निकल आते हैं। जिन सांपों में पूंछ के निचले हिस्से को रगडऩे पर ऐसा नहीं होता है वे मादा सांप होते हैं।
नर और मादा सांपों की दुम के मूल में मौजूद गुदा द्वार पर कस्तूरी ग्रंथियां होती हैं। हर जाति के सांप की कस्तूरी ग्रंथियों में अलग-अलग गंध होती हैं। प्रजनन काल के दौरान माता सांप अपनी कस्तूरी ग्रंथि से गंध छोड़ती है, जिससे नर उसका पीछा करता है और उसे ढूँढ लेता है।
पानी के सांप, अजगर, धामन आदि प्रजाति के सांप अंडे देते हैं जबकि मिट्टी का सांप, रसल, घोणस, हरा लता सांप, समुद्री सांप आदि शिशु को जन्म देते हैं। जोड़ा बनाने और अंडे देने के बीच का समय लगभग 60-80 दिनों का होता है। लगभग इतना ही समय अंडों से बच्चों को निकलने में लग जाता है।
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