जानिए देवशिल्पी भगवान विशवकर्मा ने किये थे क्या-क्या निर्माण ?

Wednesday, 10 August 2016

जानिए देवशिल्पी भगवान विशवकर्मा ने किये थे क्या-क्या निर्माण ?


जानिए देवशिल्पी भगवान विशवकर्मा ने किये थे क्या-क्या निर्माण ?

Bhagwan Vishwkarma ne kiye the ye nirman : भगवान विशवकर्मा को देवताओं का आर्किटेक्ट या देवशिल्पी कहा जाता है। उन्हें हम दुनिया के प्रथम  आर्किटेक्ट और इंजीनियर भी कह सकते है। हमारे धर्म ग्रंथों के अनुसार देवताओं के लिए भवनों, महलों व रथों आदि का निर्माण विश्वकर्मा ही करते थे। हम यहाँ पर आपको भगवान विशवकर्मा के द्वारा किये गए कुछ प्रमुख निर्माणों के बारे में बताएँगे।
Bhagwan Vishwkarma ne kiye the ye nirman
कौन थे विशवकर्मा :-
स्कंद पुराण के प्रभात खण्ड में एक श्लोक मिलता है-
अर्थात- महर्षि अंगिरा के ज्येष्ठ पुत्र बृहस्पति की बहन भुवना जो ब्रह्मविद्या जानने वाली थी, वह अष्टम् वसु महर्षि प्रभास की पत्नी बनी और उससे संपूर्ण शिल्प विद्या के ज्ञाता प्रजापति विश्वकर्मा का जन्म हुआ। पुराणों में कहीं योगसिद्धा, वरस्त्री नाम भी बृहस्पति की बहन का लिखा है।
देवशिल्पी विशवकर्मा के कुछ प्रमुख निर्माण :-
Construction of Golden Lanka
         सोने की लंका (प्रतीकात्मक फोटो)
वाल्मीकि रामायण के अनुसार सोने की लंका का निर्माण विश्वकर्मा ने ही किया था। पूर्वकाल में माल्यवान, सुमाली और माली नाम के तीन पराक्रमी राक्षस थे। वे एक बार विश्वकर्मा के पास गए और कहा कि आप हमारे लिए एक विशाल व भव्य निवास स्थान का निर्माण कीजिए। तब विश्वकर्मा ने उन्हें बताया कि दक्षिण समुद्र के तट पर त्रिकूट नामक एक पर्वत है, वहां इंद्र की आज्ञा से मैंने स्वर्ण निर्मित लंका नगरी का निर्माण किया है। तुम वहां जाकर रहो। इस प्रकार लंका में राक्षसों का आधिपत्य हो गया। जबकि कहीं धर्म ग्रंथो में वर्णन है की विशवकर्मा ने सोने की लंका निर्मित करके नलकुबेर को दी थी जो की रावण का सौतेला भाई था। विशवकर्मा के कहने पर ही नल कुबेर ने सोने की लंका बाद में रावण को सौप दी थी।
Construction of Ramsetu
वाल्मीकि रामायण के अनुसार भगवान श्रीराम के आदेश पर समुद्र पर पत्थरों से पुल का निर्माण किया गया था। रामसेतु का निर्माण मूल रूप से नल नाम के वानर ने किया था। नल शिल्पकला (इंजीनियरिंग) जानता था क्योंकि वह देवताओं के शिल्पी विश्वकर्मा का पुत्र था। अपनी इसी कला से उसने समुद्र पर सेतु का निर्माण किया था।
महाभारत के अनुसार तारकाक्ष, कमलाक्ष व विद्युन्माली के नगरों का विध्वंस करने के लिए भगवान महादेव जिस रथ पर सवार हुए थे, उस रथ का निर्माण विश्वकर्मा ने ही किया था। वह रथ सोने का था। उसके दाहिने चक्र में सूर्य और बाएं चक्र में चंद्रमा विराजमान थे। दाहिने चक्र में बारह आरे तथा बाएं चक्र में 16 आरे लगे थे।

                                      Construction of  Shri Krishna's Dwarika
श्रीमद्भागवत के अनुसार द्वारिका नगरी का निर्माण भी विश्वकर्मा ने ही किया था। उस नगरी में विश्वकर्मा का विज्ञान (वास्तु शास्त्र व शिल्पकला) की निपुणता प्रकट होती थी। द्वारिका नगरी की लंबाई-चौड़ाई 48 कोस थी। उसमें वास्तु शास्त्र के अनुसार बड़ी-बड़ी सड़कों, चौराहों और गलियों का निर्माण किया गया था।

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