Tuesday, 29 August 2017

8 पौराणिक बच्चों की कहानियां, जिन्होंने बचपन में ही कर दिए थे महान कार्य


8 पौराणिक बच्चों की कहानियां, जिन्होंने बचपन में ही कर दिए थे महान कार्य



Hindi Stories of Mythological Children : हमारे धर्म ग्रंथों में ऐसे अनेक बच्चों के बारे में बताया गया है जिन्होंने कम उम्र में ही कुछ ऐसे काम किए, जिन्हें करना किसी के बस में नहीं था। लेकिन अपनी ईमानदारी, निष्ठा व समर्पण के बल पर उन्होंने मुश्किल काम भी बहुत आसानी से कर दिए। आज हम आपको 8 ऐसे ही बच्चों के बारे में बता रहे हैं-

1. बालक ध्रुव (Balak Dhruv)

Hindi Stories of Hindu mythological children
बालक ध्रुव की कथा का वर्णन श्रीमद्भागवत में मिलता है। उसके अनुसार ध्रुव के पिता का नाम उत्तानपाद था। उनकी दो पत्नियां थीं, सुनीति और सुरुचि। ध्रुव सुनीति का पुत्र था। एक बार सुरुचि ने बालक ध्रुव को यह कहकर राजा उत्तानपाद की गोद से उतार दिया कि मेरे गर्भ से पैदा होने वाला ही गोद और सिंहासन का अधिकारी है। बालक ध्रुव रोते हुए अपनी मां सुनीति के पास पहुंचा। मां ने उसे भगवान की भक्ति के माध्यम से ही लोक-परलोक के सुख पाने का रास्ता सूझाया।

माता की बात सुनकर ध्रुव ने घर छोड़ दिया और वन में पहुंच गया। यहां देवर्षि नारद की कृपा से ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र की दीक्षा ली। यमुना नदी के किनारे मधुवन में बालक ध्रुव ने इस महामंत्र को बोल घोर तप किया। इतने छोटे बालक की तपस्या से खुश होकर भगवान विष्णु प्रकट हुए। भगवान विष्णु ने बालक ध्रुव को ध्रुवलोक प्रदान किया। आकाश में दिखाई देने वाला ध्रुव तारा बालक ध्रुव का ही प्रतीक है।

2. गुरुभक्त आरुणि (Guru bhakt Aruni)

2. गुरुभक्त आरुणि (Guru bhakt Aruni)
महाभारत के अनुसार आयोदधौम्य नाम के एक ऋषि थे। उनके एक शिष्य का नाम आरुणि था। वह पांचालदेश का रहने वाला था। आरुणि अपने गुरु की हर आज्ञा का पालन करता था। एक दिन गुरुजी ने उसे खेत की मेढ़ बांधने के लिए भेजा। गुरु की आज्ञा से आरुणि खेत पर गया और मेढ़ बांधने का प्रयास करने लगा। काफी प्रयत्न करने के बाद भी जब वह खेत की मेढ़ नहीं बांध पाया तो मेढ़ के स्थान पर वह स्वयं लेट गया ताकि पानी खेत के अंदर न आ सके।
जब बहुत देर तक आरुणि आश्रम नहीं लौटा तो उसके गुरु अपने अन्य शिष्यों के साथ उसे ढूंढते हुए खेत तक आ गए। यहां आकर उन्होंने आरुणि को आवाज लगाई। गुरु की आवाज सुनकर आरुणि उठकर खड़ा हो गया। जब उसने पूरी बात अपने गुरु को बताई तो आरुणि की गुरुभक्ति देखकर गुरु आयोदधौम्य बहुत प्रसन्न हुए और उसे सारे वेद और धर्मशास्त्रों का ज्ञान हो जाने का आशीर्वाद दिया।


3. परमज्ञानी अष्टावक्र (Ashtavakra rishi)

3. परमज्ञानी अष्टावक्र (Ashtavakra rishi)
प्राचीन काल में कहोड नामक एक ब्राह्मण थे। उनकी पत्नी का नाम सुजाता था। समय आने पर सुजाता गर्भवती हुई। एक दिन जब कहोड वेदपाठ कर रहे थे, तभी सुजाता के गर्भ में स्थित शिशु बोला – पिताजी। आप रातभर वेदपाठ करते हैं, किंतु वह ठीक से नहीं होता। गर्भस्थ शिशु के इस प्रकार कहने पर कहोड क्रोधित होकर बोले कि- तू पेट में ही ऐसी टेढ़ी-मेढ़ी बातें करता है, इसलिए तू आठ स्थानों से टेढ़ा उत्पन्न होगा। इस घटना के कुछ दिन बाद कहोड राजा जनक के पास धन की इच्छा से गए।
वहां बंदी नामक विद्वान से वे शास्त्रार्थ में हार गए। नियमानुसार उन्हें जल में डूबा दिया गया। कुछ दिनों बाद अष्टावक्र का जन्म हुआ किंतु उसकी माता ने उसे कुछ नहीं बताया। जब अष्टावक्र 12 वर्ष का हुआ, तब एक दिन उसने अपनी माता से पिता के बारे पूछा। तब माता ने उसे पूरी बात सच-सच बता दी। अष्टावक्र भी राजा जनक के दरबार में शास्त्रार्थ करने के लिए गया। यहां अष्टावक्र और बंदी के बीच शास्त्रार्थ हुआ, जिसमें अष्टावक्र ने उसे पराजित कर दिया।
अष्टावक्र ने राजा से कहा कि बंदी को भी नियमानुसार जल में डूबा देना चाहिए। तब बंदी ने बताया कि वह जल के स्वामी वरुणदेव का पुत्र है। उसने जितने भी विद्वानों को शास्त्रार्थ में हराकर जल में डुबाया है, वे सभी वरुण लोक में हैं। उसी समय जल में डूबे हुए सभी ब्राह्मण पुन: बाहर आ गए। अष्टावक्र के पिता कहोड भी जल से निकल आए। अष्टावक्र के विषय में जानकर उन्हें बहुत प्रसन्न हुई और पिता के आशीर्वाद से अष्टावक्र का शरीर सीधा हो गया।

4. आस्तिक (Aastik)

4. आस्तिक (Aastik)
महाभारत के अनुसार आस्तिक ने ही राजा जनमेजय के सर्प यज्ञ को रुकवाया था। आस्तिक के पिता जरत्कारु ऋषि थे और उनकी माता का नाम भी जरत्कारु था। आस्तिक की माता नागराज वासुकि की बहन थी। जब राजा जनमेजय को पता चला कि उनके पिता की मृत्यु तक्षक नाग द्वारा काटने पर हुई थी तो उन्होंने सर्प यज्ञ करने का निर्णय लिया। उस यज्ञ में दूर-दूर से भयानक सर्प आकर गिरने लगे। जब यह बात नागराज वासुकि को पता चली तो उन्होंने आस्तिक से इस यज्ञ को रोकने के लिए निवेदन किया।
आस्तिक यज्ञ स्थल पर जाकर ज्ञान की बातें करने लगे, जिसे सुनकर राजा जनमेजय बहुत प्रसन्न हुए। जनमेजय ने आस्तिक को वरदान मांगने के लिए कहा, तब आस्तिक ने राजा से सर्प यज्ञ बंद करने के लिए निवेदन किया। राजा जनमेजय ने पहले तो ऐसा करने से इनकार कर दिया, लेकिन बाद में वहां उपस्थित ब्राह्मणों के कहने पर उन्होंने सर्प यज्ञ रोक दिया और आस्तिक की प्रशंसा की।

5. भक्त प्रह्लाद (Bhakt Prahlad)

5. भक्त प्रह्लाद (Bhakt Prahlad)
बालक प्रह्लाद की कथा का वर्णन श्रीमद्भागवत में मिलता है। प्रह्लाद के पिता हिरण्यकश्यपु दैत्यों के राजा थे। वह भगवान विष्णु को अपना शत्रु मानता था परंतु प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। जब यह बात हिरण्यकश्यपु को पता चली तो उसने प्रह्लाद पर अनेक अत्याचार किए, लेकिन फिर भी प्रह्लाद की ईश्वर भक्ति कम न हुई। अंत में स्वयं भगवान विष्णु प्रह्लाद की रक्षा के लिए नृसिंह अवतार लेकर प्रकट हुए। नृसिंह भगवान ने हिरण्यकश्यपु का वध कर दिया और प्रह्लाद को अपनी गोद में बैठा कर प्रेम किया।

6. गुरुभक्त उपमन्यु (Guru bhakt Upamanyu)

6. गुरुभक्त उपमन्यु (Guru bhakt Upamanyu)
गुरु आयोदधौम्य के एक शिष्य का नाम उपमन्यु था। वह बड़ा गुरुभक्त था। गुरु की आज्ञा से वह रोज गाय चराने जाता था। एक दिन गुरु ने उससे पूछा कि तुम अन्य शिष्यों से मोटे और बलवान दिख रहे हो। तुम क्या खाते हो? तब उपमन्यु ने बताया कि मैं भिक्षा मांगकर ग्रहण कर लेता हूं। गुरु ने उससे कहा कि मुझे निवेदन किया बिना तुम्हें भिक्षा का अन्न नहीं खाना चाहिए। उपमन्यु ने गुरुजी की बात मान ली।
कुछ दिनों बाद पुन: गुरुजी ने उपमन्यु से वही प्रश्न पूछा तो उसने बताया कि वह गायों का दूध पीकर अपनी भूख मिटाता है। तब गुरु ने उसे ऐसा करने से भी मना कर दिया, लेकिन इसके बाद भी उपमन्यु के पहले जैसे दिखने पर गुरुजी ने उससे पुन: वही प्रश्न किया। तब उपमन्यु ने बताया कि बछड़े गाय का दूध पीकर जो फेन (झाग) उगल देते हैं, वह उसका सेवन करता है। गुरु आयोदधौम्य ने उसे ऐसा करने से भी मना कर दिया।
जब उपमन्यु के सामने खाने-पीने के सभी रास्ते बंद हो गए तब उसने एक दिन भूख से व्याकुल होकर आकड़े के पत्ते खा लिए। वह पत्ते जहरीले थे। उन्हें खाकर उपमन्यु अंधा हो गया और वह वन में भटकने लगा। दिखाई न देने पर उपमन्यु एक कुएं में गिर गया। जब उपमन्यु शाम तक आश्रम नहीं लौटा तो गुरु अपने अन्य शिष्यों के साथ उसे ढूंढने वन में पहुंचे। वन में जाकर गुरु ने उसे आवाज लगाई तब उपमन्यु ने बताया कि वह कुएं में गिर गया है।
गुरु ने जब इसका कारण पूछा तो उसने सारी बात सच-सच बता दी। तब गुरु आयोदधौम्य ने उपमन्यु को देवताओं के चिकित्सक अश्विनी कुमार की स्तुति करने के लिए कहा। उपमन्यु ने ऐसा ही किया। स्तुति से प्रसन्न होकर अश्विनी कुमार प्रकट हुए और उपमन्यु को एक फल देकर बोले कि इसे खाने से तुम पहले की तरह स्वस्थ हो जाओगे। उपमन्यु ने कहा कि बिना अपने गुरु को निवेदन किए मैं यह फल नहीं खा सकता।
उपमन्यु की गुरुभक्ति से प्रसन्न होकर अश्विन कुमार ने उसे पुन: पहले की तरह स्वस्थ होने का वरदान दिया, जिससे उसकी आंखों की रोशनी भी पुन: लौट आई। गुरु के आशीर्वाद से उसे सारे वेद और धर्मशास्त्रों का ज्ञान हो गया।

7. मार्कण्डेय ऋषि (Markandeya Rishi)

7. मार्कण्डेय ऋषि (Markandeya Rishi)
धर्म ग्रंथों के अनुसार मार्कण्डेय ऋषि अमर हैं। आठ अमर लोगों में मार्कण्डेय ऋषि का भी नाम आता है। इनके पिता मर्कण्डु ऋषि थे। जब मर्कण्डु ऋषि को कोई संतान नहीं हुई तो उन्होंने अपनी पत्नी के साथ भगवान शिव की आराधना की। उनकी तपस्या से प्रकट हुए भगवान शिव ने उनसे पूछा कि वे गुणहीन दीर्घायु पुत्र चाहते हैं या गुणवान 16 साल का अल्पायु पुत्र। तब मर्कण्डु ऋषि ने कहा कि उन्हें अल्पायु लेकिन गुणी पुत्र चाहिए। भगवान शिव ने उन्हें ये वरदान दे दिया।
जब मार्कण्डेय ऋषि 16 वर्ष के होने वाले थे, तब उन्हें ये बात अपनी माता द्वारा पता चली। अपनी मृत्यु के बारे में जानकर वे विचलित नहीं हुए और शिव भक्ति में लीन हो गए। इस दौरान सप्तऋषियों की सहायता से ब्रह्मदेव से उनको महामृत्युंजय मंत्र की दीक्षा मिली। इस मंत्र का प्रभाव यह हुआ कि जब यमराज तय समय पर उनके प्राण हरने आए तो शिव भक्ति में लीन मार्कण्डेय ऋषि को बचाने के लिए स्वयं भगवान शिव प्रकट हो गए और उन्होंने यमराज के वार को बेअसर कर दिया। बालक मार्कण्डेय की भक्ति देखकर भगवान शिव ने उन्हें अमर होने का वरदान दिया।

8. गुरुभक्त एकलव्य (Guru bhakt Eklavya)

8. गुरुभक्त एकलव्य (Guru bhakt Eklavya)
एकलव्य की कथा का वर्णन महाभारत में मिलता है। उसके अनुसार एकलव्य निषादराज हिरण्यधनु का पुत्र था। वह गुरु द्रोणाचार्य के पास धनुर्विद्या सीखने गया था, लेकिन राजवंश का न होने के कारण द्रोणाचार्य ने उसे धनुर्विद्या सिखाने से मना कर दिया। तब एकलव्य ने द्रोणाचार्य की एक प्रतिमा बनाई और उसे ही गुरु मानकर धनुर्विद्या का अभ्यास करने लगा। एक बार गुरु द्रोणाचार्य के साथ सभी राजकुमार शिकार के लिए वन में गए।
उस वन में एकलव्य अभ्यास कर रहा था। अभ्यास के दौरान कुत्ते के भौंकने पर एकलव्य ने अपने बाणों से कुत्ते का मुंह बंद कर दिया। जब द्रोणाचार्य व राजकुमारों ने कुत्ते को इस हाल में देखा तो वे उस धनुर्धर को ढूंढने लगे, जिसने इतनी कुशलता से बाण चलाए थे। एकलव्य को ढूंढने पर द्रोणाचार्य ने उससे उसके गुरु के बारे में पूछा। एकलव्य ने बताया कि उसने प्रतिमा के रूप में ही द्रोणाचार्य को अपना गुरु माना है। तब गुरु द्रोणाचार्य ने गुरु दक्षिणा के रूप में एकलव्य से दाहिने हाथ का अंगूठा मांग लिया। एकलव्य ने बिना कुछ सोचे अपने अंगूठा द्रोणाचार्य को दे दिया।

चाणक्य नीति- पुरुषों को ये 4 बातें कभी भी किसी को बतानी नहीं चाहिए


चाणक्य नीति- पुरुषों को ये 4 बातें कभी भी किसी को बतानी नहीं चाहिए

 

 

आचार्य चाणक्य द्वारा बताई गई नीतियों में सफल और सुखी जीवन के कई सूत्र बताए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति चाणक्य की नीतियों का पालन करता है तो निश्चित ही वह कई प्रकार की परेशानियों से बच सकता है। अक्सर जाने-अनजाने कुछ लोग ऐसी बातें दूसरों को बता देते हैं, जो भविष्य में किसी बड़े संकट का कारण बन जाती हैं। चाणक्य ने मुख्य रूप से चार ऐसी बातें बताई हैं, जिन्हें हमेशा राज ही रखना चाहिए। जो लोग ये बातें अन्य लोगों के सामने जाहिर कर देते हैं, वे परेशानियों का सामना करते हैं।
Chanakya Niti We Should Not Disclose Our This Type Of Secrets

आचार्य कहते हैं कि-
अर्थनाशं मनस्तापं गृहिणीचरितानि च।
नीचवाक्यं चाऽपमानं मतिमान्न प्रकाशयेत्।।

गुप्त रखने योग्य प्रथम बात
इस श्लोक में पहली बात ये बताई गई है कि हमें कभी अर्थ नाश यानी धन की हानि से जुड़ी बातें किसी पर जाहिर नहीं करनी चाहिए। यदि हमें धन की हानि का सामना करना पड़ रहा है और हमारी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है तो यह स्थिति किसी के सामने प्रकट नहीं करनी चाहिए, क्योंकि जब ये बात सभी को मालूम हो जाएगी तो धन संबंधी मामलों में कोई भी मदद नहीं करेगा। समाज में गरीब व्यक्ति को धन की मदद आसानी से प्राप्त नहीं हो पाती है। अत: इस बात को सदैव राज ही रखना चाहिए।
गुप्त रखने योग्य दूसरी बात
चाणक्य ने गुप्त रखने योग्य दूसरी बात यह बताई है कि हमें कभी भी मन संताप यानी दुख की बातें किसी पर जाहिर नहीं करनी चाहिए। यदि हम मन का संताप दूसरों पर जाहिर करेंगे तो लोग उसका मजाक बना सकते हैं, क्योंकि समाज में ऐसे लोग काफी हैं, जो दूसरों के दुखों का मजाक बनाते हैं। ऐसा होने पर दुख और बढ़ जाता है।
गुप्त रखने योग्य तीसरी बात
यहां दिए गए श्लोक में तीसरी गुप्त रखने योग्य बात है गृहिणी (पत्नी) का चरित्र। समझदार पुरुष वही है, जो अपनी पत्नी से जुड़ी सभी बातें गुप्त रखता है। घर-परिवार के झगड़े, सुख-दुख आदि बातें समाज में जाहिर नहीं करनी चाहिए। जो पुरुष ऐसा करते हैं, उन्हें भविष्य में भयंकर परिणाम झेलने पड़ सकते हैं।

गुप्त रखने योग्य चौथी बात
यहां दिए गए श्लोक में चौथी गुप्त रखने योग्य बात यह है की यदि जीवन में कभी भी किसी नीच व्यक्ति ने हमारा अपमान किया हो तो वह घटना भी किसी को बतानी नहीं चाहिए। ऐसी घटनाओं की जानकारी अन्य लोगों को मालूम होगी तो वे भी हमारा मजाक बनाएंगे और हमारी प्रतिष्ठा में कमी आएगी।

कौन हैं चाणक्य
प्राचीन समय में आचार्य चाणक्य तक्षशिला के गुरुकुल में अर्थशास्त्र के आचार्य थे। चाणक्य की राजनीति में गहरी पकड़ थी। इनके पिता का नाम आचार्य चणीक था, इसी वजह से इन्हें चणी पुत्र चाणक्य भी कहा जाता है। संभवत: पहली बार कूटनीति का प्रयोग आचार्य चाणक्य द्वारा ही किया गया था। जब इन्होंने अपनी कूटनीति के बल पर सम्राट सिकंदर को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया। इसके अतिरिक्त कूटनीति से ही इन्होंने चंद्रगुप्त जैसे सामान्य बालक को अखंड भारत का सम्राट भी बनाया। आचार्य चाणक्य द्वारा श्रेष्ठ जीवन के लिए चाणक्य नीति ग्रंथ रचा गया है। इसमें दी गई नीतियों का पालन करने पर जीवन में सफलताएं प्राप्त होती हैं।

चाणक्य नीति- संस्कारहीन घर की ऐसी कन्या से विवाह किया जा सकता है


चाणक्य नीति- संस्कारहीन घर की ऐसी कन्या से विवाह किया जा सकता है

 

 तिदिन कई लोगों से हमारा संपर्क होता है, उनमें से कुछ अच्छे चरित्र और व्यवहार वाले होते हैं तो कुछ बुरे स्वभाव वाले होते हैं। अच्छे लोगों से सीखने और लेने के लिए काफी कुछ रहता है लेकिन हम बुरे लोगों से भी अच्छी बातें ग्रहण कर सकते हैं। इस संबंध में आचार्य चाणक्य ने कहा है कि

Chankay niti about marriage with girl

श्लोक

विषादप्यमृतं ग्राह्ममेध्यादपि कांचनम्।
नीचादप्युत्तमां विद्यां स्त्रीरत्नं दुष्कुलादपि।।


इसका अर्थ है कि विष से अमृत ले लेना चाहिए। गंदगी में यदि सोना पड़ा हुआ है तो उसे उठा लेना चाहिए। कोई नीच व्यक्ति है और उसके पास कोई उत्तम विद्या है तो उसे ग्रहण कर लेना चाहिए। यदि किसी दुष्टकुल यानि संस्कारहीन परिवार में कोई सुसंस्कारी स्त्री है तो अविवाहित युवा को उस कन्या से विवाह कर लेना चाहिए।
आचार्य चाणक्य कहते हैं यदि कहीं बुराई है तो वहां से अच्छाई ग्रहण की जा सकती है। यदि कहीं विष है और वहां अमृत भी हो तो वहां से केवल अमृत को ही स्वीकार करना चाहिए। इसी प्रकार यदि कहीं गंदगी में सोने के आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तु पड़ी हो तो उसे उठा लेना चाहिए। इसके अलावा यदि कोई व्यक्ति स्वभाव से नीच है, अधर्मी है लेकिन उसके पास को उत्तम विद्या है तो उससे वह विद्या प्राप्त कर लेना चाहिए।
चाणक्य के अनुसार यदि किसी परिवार के सदस्यों के संस्कार और व्यवहार अच्छा नहीं है लेकिन वहां रहने वाली स्त्री सुसंस्कारी, शिक्षित है, गुणवान है, अविवाहित है तो उससे किसी योग्य वर को विवाह कर लेना चाहिए।

पौराणिक कथा- कैसे हुआ नारियल का जन्म?


पौराणिक कथा- कैसे हुआ नारियल का जन्म?

 

 Nariyal Birth- A mythological Story : हिन्दू धर्म में नारियल का विशेष महत्तव है।  नारियल के बिना कोई भी धार्मिक कार्यक्रम संपन्न नहीं होता है। नारियल से जुडी एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है जो जिसके अनुसार नारियल का इस धरती पर अवतरण ऋषि विश्वामित्र द्वारा किया गया था। आज हम आपको नारियल के जन्म से जुडी यही कहानी बता रहे है।
Kaise hua nariyal ka jnm
यह कहानी प्राचीन काल के एक राजा सत्यव्रत से जुड़ी है। सत्यव्रत एक प्रतापी राजा थे, जिनका ईश्वर में सम्पूर्ण विश्वास था। उनके पास सब कुछ था लेकिन उनके मन की एक इच्छा थी जिसे वे किसी भी रूप में पूरा करना चाहते थे।

वे चाहते थे की वे किसी भी प्रकार से पृथ्वीलोक से स्वर्गलोक जा सकें। स्वर्गलोक की सुंदरता उन्हें अपनी ओर आकर्षित करती थी, किंतु वहां कैसे जाना है, यह सत्यव्रत नहीं जानते थे।
एक बार ऋषि विश्वामित्र  तपस्या करने के लिए अपने घर से काफी दूर निकल गए थे और लम्बे समय से वापस नहीं आए थे। उनकी अनुपस्थिति में क्षेत्र में सूखा पड़ा गया और उनका परिवार भूखा-प्यासा भटक रहा था। तब राजा सत्यव्रत ने उनके परिवार की सहायता की और उनकी देख-रेख की जिम्मेदारी ली।

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जब ऋषि विश्वामित्र वापस लौटे तो उन्हें परिवार वालों ने राजा की अच्छाई बताई। वे राजा से मिलने उनके दरबार पहुंचे और उनका धन्यवाद किया। शुक्रिया के रूप में राजा ने ऋषि विश्वामित्र द्वारा उन्हें एक वर देने के लिए निवेदन किया। ऋषि विश्वामित्र ने भी उन्हें आज्ञा दी।
तब राजा बोले की वो स्वर्गलोक जाना चाहते हैं, तो क्या ऋषि विश्वामित्र अपनी शक्तियों का सहारा लेकर उनके लिए स्वर्ग जाने का मार्ग बना सकते हैं? अपने परिवार की सहायता का उपकार मानते हुए ऋषि विश्वामित्र ने जल्द ही एक ऐसा मार्ग तैयार किया जो सीधा स्वर्गलोक को जाता था।
राजा सत्यव्रत खुश हो गए और उस मार्ग पर चलते हुए जैसे ही स्वर्गलोक के पास पहुंचे ही थे, कि स्वर्गलोक के देवता इन्द्र ने उन्हें नीचे की ओर धकेल दिया। धरती पर गिरते ही राजा ऋषि विश्वामित्र के पास पहुंचे और रोते हुए सारी घटना का वर्णन करने लगे।
देवताओं के इस प्रकार के व्यवहार से ऋषि विश्वामित्र भी क्रोधित हो गए, परन्तु अंत में स्वर्गलोक के देवताओं से वार्तालाप करके आपसी सहमति से एक हल निकाला गया। इसके मुताबिक राजा सत्यव्रत के लिए अलग से एक स्वर्गलोक का निर्माण करने का आदेश दिया गया
 
 
ये नया स्वर्गलोक पृथ्वी  एवं असली स्वर्गलोक के मध्य में स्थित होगा, ताकि ना ही राजा को कोई परेशानी हो और ना ही देवी-देवताओं को किसी कठिनाई का सामना करना पड़े। राजा सत्यव्रत भी इस सुझाव से बेहद प्रसन्न हुए, किन्तु ना जाने ऋषि विश्वामित्र को एक चिंता ने घेरा हुआ था।
उन्हें यह बात सत्ता रही थी  कि धरती और स्वर्गलोक के बीच होने के कारण कहीं हवा के ज़ोर से यह नया स्वर्गलोक डगमगा ना जाए। यदि ऐसा हुआ तो राजा फिर से धरती पर आ गिरेंगे। इसका हल निकालते हुए ऋषि विश्वामित्र ने नए स्वर्गलोक के ठीक नीचे एक खम्बे का निर्माण किया, जिसने उसे सहारा दिया।
माना जाता है की यही खम्बा समय आने पर एक पेड़ के मोटे तने के रूप में बदल गया और राजा सत्यव्रत का सिर एक फल बन गया। इसी पेड़ के तने को नारियल का पेड़ और राजा के सिर को नारियल कहा जाने लगा। इसीलिए आज के समय में भी नारियल का पेड़ काफी ऊंचाई पर लगता है।
इस कथा के अनुसार सत्यव्रत को समय आने पर एक ऐसे व्यक्ति की उपाधि दी गई ‘जो ना ही इधर का है और ना ही उधर का। यानी कि एक ऐसा इंसान जो दो धुरों के बीच में लटका हुआ है।

Tuesday, 3 January 2017

पुरुष द्वारा सेक्स में की जाने वाली 10 कॉमन गलतियां


पुरुष द्वारा सेक्स में की जाने वाली 10 कॉमन गलतियां



10 most common sex mistakes by man in Hindi  : मर्द अक्सर बिस्तर में अपने प्रदर्शन को बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं, मगर हकीकत में अधिकतर समय उन्हें पता ही नहीं होता कि उनकी पार्टनर चाहती क्या है। एक हालिया सर्वे के अनुसार अधिकांश पुरुष उतने अच्छे लवर होते नहीं हैं जितना कि वे खुद को समझते हैं। जहां तक सेक्स की बेसिक जानकारी की बात है, पुरुष अक्सर इनमें भी गंभीर गलतियां करते हैं। हम आपको 10 ऐसी ही कॉमन गलतियों के बारे में बताने जा रहे हैं –

10 most common sex mistakes by man in Hindi
10 most common sex mistakes by man in Hindi
उस दौरान भी चुप रहना
पता नहीं क्यों, पर ये देखा गया है कि बहुत से मर्द उन खास पलों में भी चुपचाप ही रहते हैं। वे सोचते हैं कि ऐसा करना सही है, जबकि उसी समय उनकी पार्टनर खुद को अकेला फील कर रही होती है। ऐसा नहीं है कि आप बस बोलते ही जाइए, मगर खुद के रोमांच को दिखाने के लिए उससे अपनी फीलिंग्स को शेयर तो कर ही सकते हैं।
फोरप्ले भी जल्दबाजी में
एक बात हमेशा याद रखें, फोरप्ले में आप जितना ज्यादा वक्त बिताएंगे, उन खास पलों के दौरान आप उतना ही इंजॉय करेंगे। अपने पार्टनर को किस करके, उसके खास अंगों को स्पर्श करके आप भरपूर आनंद पाने में न सिर्फ उनकी, बल्कि खुद की भी मदद कर रहे होते हैं। एक अच्छे फोरप्ले सेशन के बाद ही आगे बढ़ें।

ऑर्गैज्म को भूल जाएं
उन खूबसूरत पलों को इंजॉय करते हुए ऑर्गैज्म के बारे में सोचें भी न। ऐसा करने से आप क्लाइमैक्स के दौरान आप अपने ऐक्ट से पूरी तरह फोकस खो बैठेंगे। आप खुद तो उतावलेपन से बचे हीं, अपने पार्टनर को भी ऐसी किसी भी प्रकार की जल्दबाजी से रोकें। धैर्य रखेंगे, तो हमेशा बेहतर अंत ही होगा।
लिकिंग से बचें
ऑरल सेक्स कई लोगों को अपनी तरफ खींचता है, पर जहां तक संभव हो, इसे ज्यादा न करें। कई महिलाएं ऑरल सेक्स से असहज महसूस करती हैं, वहीं डॉक्टर्स की राय भी इस बारे में कुछ ज्यादा अच्छी नहीं है।
उंगलियों को सही से यूज करें
यह सही है कि कुछ मर्दों को उंगलियों के इस्तेमाल में ज्यादा आनंद आता है, मगर याद रखें, हो सकता है यह आपकी पार्टनर को जरा भी पसंद न हो। अगर वे राजी भी हैं, तो किसी भी प्रकार की हड़बड़ी दिखाए बिना आराम से आगे बढ़ें।
उन्हें एक नर्म अहसास भी दें
कुछ मर्दों को लगता है कि वे सेक्स के दौरान जितना कठोर होंगे, उनकी पार्टनर को उतना ही आनंद आएगा। कभी-कभी ऐसा हो सकता है, पर अक्सर महिलाएं उन खास पलों को दिल की गहराइयों तक महसूस करना चाहती हैं। शुरुआत आराम से ही करें, और उनकी पसंद पूछते रहें। अगर उन्हें कुछ और चाहिए होगा, तो वे बताएंगी ही।

क्लाइटॉरिस को न करें अनदेखा
उन खास पलों के दौरान महिलाओं को क्लाइटॉरिस पर अपने पार्टनर का ध्यान देना सबसे अच्छा लगता है। आपको उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उसको आराम से सहलाते हुए ही आगे बढ़ते रहें।
पूरी बॉडी को ध्यान में रखें
अगर आप चाहते हैं कि आपकी पार्टनर आपसे खुश रहे, तो सेक्स करते हुए आपको उनके पूरे शरीर का ध्यान रखना चाहिए। गर्दन और जांघों के अलावा कई और ऐसे बॉडी पार्ट्स होते हैं, जो उनकी एक्साइटमेंट को टॉप लेवल तक ले जाते हैं। उन पार्ट्स को इग्नोर न करें।

रफ भी, स्वीट भी
ऐसा नहीं कि उन्हें आपका रफ तरीका पसंद नहीं आएगा, पर उनकी और उनके शरीर की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही आगे बढ़ें। लेकिन आपको ज्यादा रफ भी नहीं होना चाहिए। रफनेस के बाद उनको अपनी नरमी का अहसास कराकर आप उनका दिल जीत सकते हैं।
जी-स्पॉट की फिक्र न करें
सेक्स के दौरान जी-स्पॉट को हिट करने की कोशिश में ही न लगे रहें। बस उस समय एक ही बात याद रखें, आप जितना ज्यादा ध्यान अपने पार्टनर की तरफ लगाएंगे, उन्हें उतना ही आनंद प्राप्त होगा। उन खास पलों को पूरी तरह इंजॉय करें

महिलाओं द्वारा की जाने वाली 9 सेक्स मिस्टेक्स


महिलाओं द्वारा की जाने वाली 9 सेक्स मिस्टेक्स





9 Sex mistakes of women in Hindi : अनिरुद्ध काफी दिनों से देख रहा था की जब वह  आरती के साथ अन्तरंग सम्बन्ध बनाना चाहता, आरती कोई न कोई बहाना बनाकर टाल देती।  रोज़ की नानुकुर से तंग आकर आखिरकार अनिरुद्ध ने झल्लाते हुए आरती,  आरती, तुम्हें हुआ क्या हैं ? जब भी मैं तुमको प्यार करना चाहता हूँ तुम या तो इग्नोर कर देती हो या फिर आज मन नहीं है, सर में दर्द है, जैसे बहाना बनाकर बात को खत्म कर देती हो। कम से कम खुलकर तो बताओ बात क्या है?’ अनिरुद्ध को गुस्सा करते हुए देख आरती रोने लगी। बड़ी मुश्किल से अनिरुद्ध ने आरती को चुप कराया।

9 Sex mistakes of women in Hindi
9 Sex mistakes of women in Hindi
यह परेशानी सिर्फ आरती की नहीं है, बल्कि अधिकतर महिलाओं को इस प्रकार की परेशानी से दो चार होना पड़ता है, क्योंकि अक्सर महिलाएं अंतरंग पलों में  जाने-अनजाने में ऐसी गलतियां कर बैठती है जो पुरुष को ना पसंद होती है और जिसका परिणाम यह होता है की सेक्स लाइफ में परेशानी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जाती है, इसलिए बहुत जरुरी है महिलाएं कुछ बातों का ख़ास ध्यान रखें।  डॉक्टर अनूप धीर कहते है, ‘ वैवाहिक जीवन में रोमांस को बनाए रखना एक कला है, इसलिए पति-पत्नी दोनों को चाहिए की आपसी समझदारी से प्यार के सागर में डूबे और सुखी वैवाहिक जीवन का भरपूर आनंद उठाएं।
यह बात सही है की यौन संबंध जीवन का एक अहम अंग है, पर कुछ कारणों से महिलाएं इसका आनंद नहीं उठा पाती है, क्योंकि उनके मन में सेक्स के प्रति अनिच्छा घर कर जाती है, जिसको निकालना जरुरी होता है, आखिर शादी को सफल बनाने में सेक्सुअल लाइफ अच्छी होनी चाहिए इसलिए कुछ चीज़ों का ध्यान बहुत जरुरी होता है।

यह बात सही है की सेक्स सिर्फ तन की जरुरत नहीं है, बल्कि प्यार जताने का माध्यम भी है, इसलिए बाहर जरुरी है की वैवाहिक जीवन में रोमन को बनाए रखने के लिए बहुत कुछ छोटी-छोटी बातें व सेक्स ट्रिक्स अपनाई जाएँ, ताकि शादी-शुदा ज़िन्दगी प्यार से सरोबार रहे।
1. आज मूड नहीं
भागती-दौड़ती ज़िन्दगी में समयाभाव के चलते सेक्सुअल लाइफ ज्यादा प्रभावित हो रही है, जिसका नतीजा यह है की पति-पत्नी जब बैडरूम में होते है, तो मुंह फेर कर या तो सो जाते है या फिर आज मूड नहीं का बहाना बनाकर टाल देते है, जो की गलत है।
क्या करें ?
मूड नहीं है की शिकायत को एक नियम के तौर पर न ले, बल्कि इस व्यवहार को बदले, क्योंकि अगर यह बात एक बार रिश्तों के बीच आ गई तो हमेशा बनी रहेगी।  इसलिए मूड खराब है या मूड नहीं है जैसी चीज़ों को पास फटकने न दें, बल्कि मूड को बदलकर सेक्स का भरपूर मज़ा उठाए।
2. संवादहीनता –
सेक्स के दौरान पत्नी क्या चाहती है, यह बात पति नहीं जान पाता क्योंकि पत्नी कभी खुलकर इस बारे में कहती नहीं है, जो सेक्सुअल लाइफ में ज़हर का काम करती है।
क्या करें ?
प्यार और रिश्ते की मजबूती लिए कम्युनिकेशन का होना बहुत जरुरी है, इसलिए इसे न तोड़े, क्योंकि इससे सेक्स लाइफ बेहतर होती है, मतलब बिना झिझक के खुलकर बात करें।
3. संतुष्टि न मिलना –
महिलाएं अक्सर यही सोचती हैं की वह किसी न किसी रूप में अपने पार्टनर को संतुष्ट करें। उनकी इस प्रकार की सोच पति के रुझान को काम करती है, क्योंकि सेक्स में संतुष्टि सिर्फ पति की नहीं होती है।
क्या करें ?
महिलाओं की तरह पति भी चाहते हैं कि पत्नी को पूरी संतुष्टि मिलें, इसलिए अगर सेक्सुअल लाइफ में पति की तरफ से कुछ परेशानी है तो उन्हें बताएं, ताकि वो उस कमी को दूर करके आपको पूरी तरह संतुष्ट कर सकें।
4. पहले तुम, पहले तुम-
अक्सर देखने में आता है की पति ही सेक्स के लिए पहल करता है, पत्नी कभी नहीं करती। इस तरह का व्यवहार यह दर्शाता है की सामने वाले की चाहत है बस, जो की पति को पसंद आती।
क्या करें ?
चलिए हमेशा वो पहल करते हैं तो फिर कभी-कभी क्यों न आप पहल करें। अरे जनाब बराबर का हिसाब रखें। आपके द्वारा की गई पहल क्या असर दिखाएंगी, वो तो पहल करने पर ही पता चलेगा। आपकी एक छोटी-सी पहल सेक्स लाइफ में नई स्फूर्ति का संचार कर सकती है।
5. फोर प्ले का न होना-
जैसे-जैसे समय बीतता जाता है, सेक्स को अधिकतर स्त्रियां एक झंझट के तौर पर लेने लगती है।  उन्हें लगने लगता है बस जल्दी से ये काम खत्म हो।  पत्नी का इस तरह का व्यवहार पति को दुखी करता है, जिसके कारण वो फोर प्ले का आनंद नहीं उठा पाते।
क्या करें ?
सेक्स को बेहतर बनाने के लिए जरुरी है की फोर प्ले का भरपूर मज़ा उठाएं, क्योंकि जितना बेहतर फोर प्ले होगा उतना ही अच्छा सेक्स होगा। इसके समय को काम करने के बजाए बढ़ाएं। नए-नए तरीकों से फोर प्ले करे, ताकि उत्साह बना रहे।
6. उत्साह में कमी –
सेक्स के दौरान कई बार स्त्रियां अपने उत्साह को दबाए रखती है, उनको लगता है की पति कुछ गलत न समझे। आपका इस तरह का व्यवहार पार्टनर को यह दर्शाता है की आप सिर्फ औपचारिकता निभा रही है।
क्या करें ?
पूरे जोश के साथ पार्टनर का साथ दें, ताकि उसको ये न लगे की आपका उत्साह कम है, उनको उत्साहित करने के लिए हंसी-मजाक का भी सहारा ले सकती है। आपका उत्साह देखकर पति को यह महसूस होगा की आप उनसे पूरी तरह जुडी हुई है।
7. बंधनों में बंधना –
सेक्स के दौरान अधिकतर महिलाएं पति को कुछ नियमों में बाँध देती है, जैसे-लाइट ऑफ़ करना, समय का ध्यान आदि।  उनके इस तरह के बंधन से पति का मूड काफी खराब हो जाता है, जिसको कंट्रोल कर पाना पति के हाथ में नहीं होता और वह सारा गुस्सा पत्नी पर निकालते है।
क्या करें ?
पति को किसी प्रकार के बंधन में न बांधे, बल्कि अपनी सोच को बदले।  अपने आप से कुछ प्रश्न करें और अगर आपको लगे की आपको उन प्रश्नों का उत्तर नहीं मिल रहा है तो पति से शेयर करें, वो आपकी समस्या का समाधान कर सारी परेशानियों को दूर कर देंगे।
8. बदलाव का मन हो –
सेक्सुअल लाइफ में अगर पति थोड़ा चेंज लाना चाहते हैं तो पत्नी फ़ालतू का काम कह कर इग्नोर कर देती है। वह सोचती है की बस एक काम है, जिसको खत्म करना जरुरी है।  उनकी यह सोच पति के एक्सपेरिमेंट पर पानी फेर देती है।
क्या करें ?
पतिदेव सेक्सुअल लाइफ में बदलाव चाहते है तो उन्हें करने दीजिए, क्योंकि एक जैसी सेक्स लाइफ से वह बोर हो जाते है। इसलिए अलग प्रकार के पोजीशन ट्राई करे। बस आप एक मौका तो उन्हें दीजिए, फिर देखिएगा ज़िन्दगी कितनी रंगीन हो जाएगी।
9. सचेत रहना –
फिगर को लेकर महिलाये बहुत ज्यादा कांशियस रहती है।  दिलो-दिमाग में यह बात घर कर जाती है की अगर वह मोटी या बहुत ज्यादा पतली हो गई तो पति उनको छोड़ देगा।  उनकी यही सोच सेक्स में नीरसता लाती है।
क्या करें ?
सबसे पहले अपनी सोच को बदले।  अगर आप फिगर को लेकर सतर्क रहती है तो एक्सरसाइज़ करें। एक बात को गाँठ बाँध ले की एक बेहतर सेक्स के लिए शरीर से ज्यादा जरुरी होता है प्यार।


पौराणिक कहानी: सेक्स कौन ज़्यादा एंजाय करता है – स्त्री या पुरुष?


पौराणिक कहानी: सेक्स कौन ज़्यादा एंजाय करता है – स्त्री या पुरुष?



Who enjoy better sex, Man or Woman – 2 Mythological Hindi Story : यह एक काफी पुरानी बहस है की सम्भोग के वक़्त स्त्री और पुरुष में से कौन ज्यादा आनंद उठता है। इस बारे में सब के अलग-अलग मत हो सकते है। हिन्दुओं के प्रसिद्द धर्म ग्रन्थ “महाभारत” और ग्रीक (यूनान) के धर्म ग्रन्थ में इस प्रश्न का जवाब देती दो कथाएँ है और आश्चर्यजनक रूप से दोनों पौराणिक कथाओं का निष्कर्ष एक ही है। आज इस लेख में हम आपको वो दोनों कथाएं बताएंगे।

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जब युधिष्ठिर ने पितामह भीष्म से किया यह प्रश्न
एक बार युधिष्ठिरअपने पितामह भीष्म के पास गए और बोले “हे तात श्री! क्या आप मेरी एक दुविधा सुलझाएंगे? क्या आप मुझे सच सच बताएंगे की स्त्री या पुरुष दोनो में से वो कौन है जो सम्भोग के समय ज़्यादा आनंद को प्राप्त करता है?” भीष्म बोले, “इस सम्बंध में तुम्हें भंगस्वाना और सकरा की कथा सुनाता हूँ, जिसमे तुम्हारे सवाल का जवाब छुपा है। ”

भंगस्वाना और सकरा की कथा
बहुत समय पहले भंगस्वाना नाम का एक राजा रहता था। वह न्यायप्रिय और बहुत यशस्वी था लेकिन उसके कोई पुत्र नहीं था। एक बालक की इच्छा में उस राजा ने एक अनुष्ठान किया जिसका नाम था ‘अग्नीष्टुता’. क्यूंकि उस हवन में केवल अग्नि भगवान का आदर हुआ था इसलिए देवराज इन्द्र काफी क्रोधित हो गए।
इंद्र अपने गुस्से को  निकालने के लिए एक मौका ढूँडने लगे ताकि राजा भंगस्वाना से कोई गलती हो और वह उसे दंड दे सकें। पर भंगस्वाना इतना अच्छा राजा था की इन्द्र को कोई मौका नहीं मिल रहा था जिस कारण से इन्द्र का गुस्सा और बढ़ता जा रहा था था। एक दिन राजा शिकार पर निकला, इन्द्र ने सोचा ये सही समय है और अपने अपमान का बदला लेने का और इन्द्र ने राजा को सम्मोहित कर दिया।
राजा भंगस्वाना जंगल में इधर-उधर भटकने लगा. अपनी सम्मोहित हालत में वह सब सुध खो बैठा, ना उसे दिशाएं समझ आ रही थीं और ना ही अपने सैनिक नहीं दिख रहे थे. भूख-प्यास ने उसे और व्याकुल कर दिया था। अचानक उसे एक छोटी सी नदी दिखाई थी जो किसी जादू सी सुन्दर लग रही थी. राजा उस नदी की तरफ बढ़ा और पहले उसने अपने घोड़े को पानी पिलाया, फिर खुद पिया।

जैसे ही राजा ने नदी के अंदर प्रवेश की, पानी पिया, उसने देखा की वह बदल रहा है। धीरे-धीरे वह एक स्त्री में बदल गया। शर्म से बोझल वह राजा ज़ोर ज़ोर से विलाप करने लगा. उसे समझ नहीं आरहा था की ऐसा उसके साथ क्यूं हुआ।
राजा भंगस्वाना सोचने लगा, “हे प्रभु! इस अनर्थ के बाद में कैसे अपने राज्य वापस जाउं? मेरे अग्नीष्टुता’ अनुष्ठान से मेरे 100 पुत्र हुए हैं उन्हें मैं अब कैसे मिलूंगा, क्या कहूंगा? मेरी रानी, महारानी जो मेरी प्रतीक्षा कर रहीं हैं, उनसे कैसे मिलूंगा? मेरे पोरुष के साथ-साथ मेरा राज-पाट सब चला जाएगा, मेरी प्रजा का क्या होगा” इस तरह से विलाप करता राजा अपने राज्य वापस लौटा।
स्त्री के रूप में जब राजा वापस पँहुचा तो उसे देख कर सभी लोग अचंभित रह गए। राजा ने सभा बुलाई और अपनी रानियों, पुत्रों और मंत्रियों से कहा की अब मैं राज-पाट संभालने के लायक नहीं रहा हूँ, तुम सभी लोग सुख से यहाँ रहो और मैं जंगल में जाकर अपना बाकी का जीवन बीताउंगा.
ऐसा कह कर वह राजा जंगल की तरफ प्रस्थान कर गया। वहां जाकर वह स्त्री रूप में एक तपस्वी के आश्रम में रहने लगी जिनसे उसने कई पुत्रों को जन्म दिया। अपने उन पुत्रों को वह अपने पुराने राज्य ले गयी और अपने पुराने बच्चो से बोली, “तुम मेरे पुत्र हो जब में एक पुरुष था, ये मेरे पुत्र हैं जब में एक स्त्री हूँ। मेरे राज्य को मिल कर, भाइयों की तरह संभालो।” सभी भाई मिलकर रहने लगे।
सब को सुख से जीवन व्यतीति करता देख, देवराज इन्द्र और ज़्यादा क्रोधित हो जाए और उनमें बदले की भावना फिर जागने लगी। इन्द्र सोचने लगा की ऐसा लगता है की राजा को स्त्री में बदल कर मैने उसके साथ बुरे की जगह अच्छा कर दिया है। ऐसा कह कर इन्द्र ने एक ब्राह्मण का रूप धारा और पहुँच गया राजा भंगस्वाना के राज्य में। वहां जाकर उसने सभी राजकुमारों के कान भरने शुरू कर दिए।
इंद्र के भड़काने की  वजह से सभी भाई आपस में लड़ पड़े और एक दूसरे को मार डाला। जैसे ही भंगस्वाना को इस बात का पता चला वह शोकाकुल हो गया। ब्राह्मण के रूप में इन्द्र राजा के पास पहुंचा और पूछा की वह क्यूँ रो रही है। भंगस्वाना ने रोते रोते पूरी घटना इन्द्र को बताई तो इन्द्र ने अपना असली रूप दिखा कर राजा को उसकी गलती के बारे में बताया।
इंद्र ने कहा, “क्योंकि तुमने सिर्फ अग्नि को पूजा और मेरा अनादर किया इसलिए मैने तुम्हारे साथ यह खेल रचा।” यह सुनते ही भंगस्वाना इन्द्र के पैरों में गिर गया और अपने अनजाने में किया अपराध के लिए क्षमा मांगी। राजा की ऐसी दयनीय दशा देख कर इन्द्र को दया आ गई. इन्द्र ने राजा को माफ करते हुए अपने पुत्रों को जीवित करवाने का वरदान दिया।
इंद्र बोले, “हे स्त्री रूपी राजन, अपने बच्चों में से किन्ही एक को जीवित कर लो” भंगस्वाना ने इन्द्र से कहा अगर ऐसी ही बात है तो मेरे उन पुत्रों को जीवित कर दो जिन्हे मैने स्त्री की तरह पैदा किया है। हैरान होते हुए इन्द्र ने इसका कारण पूछा तो राजा ने जवाब दिया, “हे इन्द्र! एक स्त्री का प्रेम, एक पुरुष के प्रेम से बहुत अधिक होता है इसीलिए मैं अपनी कोख से जन्मे बालकों का जीवन-दान मांगती हूँ।”
भीष्म ने इस कथा  को आगे बढाते हुए युधिष्ठिर को कहा की इन्द्र यह सब सुन कर प्रसन्न हो गए और उन्होने राजा के सभी पुत्रों को जीवित कर दिया. उसके बाद इन्द्र ने राजा को दुबारा पुरुष रूप देने की बात की. इन्द्र बोले, “तुमसे खुश होकर हे भंगस्वाना मैं तुम्हे वापस पुरुष बनाना चाहता हूँ” पर राजा ने साफ मना कर दिया।
स्त्री रुपी भंगस्वाना बोला, “हे देवराज इन्द्र, मैं स्त्री रूप में ही खुश हूँ और स्त्री ही रहना चाहता हूँ” यह सुनकर इन्द्र उत्सुक होगए और पूछ बैठे की ऐसा क्यूँ राजन, क्या तुम वापस पुरुष बनकर अपना राज-पाट नहीं संभालना चाहते?” भंगस्वाना बोला, “क्यूंकि सम्भोग के समय स्त्री को पुरुष से कई गुना ज़्यादा आनंद, तृप्ति और सुख मिलता है इसलिए मैं स्त्री ही रहना चाहूंगा।” इन्द्र ने “तथास्तु” कहा और वहां से प्रस्थान किया।
भीष्म बोले, “हे युधिष्ठिर यह बात स्पष्ट है की स्त्री को सम्बंधों के समय पुरुष से ज़्यादा सुख मिलता है।”
ऐसी ही एक कहानी का वर्णन ग्रीक धर्म ग्रंथों में है।
ग्रीक माईथोलोजी: तीरेसीआस की कहानी
तिरेसिआस नाम का एक राजा अपने युवा दिनों में एक बार जंगल में शिकार करने गया। वहां उसने दो सापों को सम्भोग करते समय लिपटे हुए देखा। तीरेसीआस को ना जाने क्या सूझा उसने अपने सिपाहियों की मदद से उन विशाल सापों को अलग करवा दिया, ऐसा करवाते ही उसे श्राप मिला की उसका पोरुष चला जाएगा और वह एक महिला में तब्दील हो गया। उन सापों का क्या हुआ इस बारे में कुछ पता नहीं है।
कई साल बाद तिरेसिआस अपने स्त्री रूप में दुबारा उसी जंगल से गुजरा। अपनी नफरत के चलते उसने अपने सिपाहियों की मदद से दुबारा एक साँप के जोड़े को अलग अलग कर दिया पर इस बार ऐसा करते ही वह पुरुष बन गया। अब वह अपनी तरह का एक ऐसा अकेला व्यक्ति था जिसने स्त्री और पुरुष दोनो का जीवन जिया था। उसी समय ग्रीक भगवान ज़ीउस और उनकी पत्नी हीरा में विवाद चल रहा था की सेक्स कौन ज़्यादा एंजाय करता है – स्त्री या पुरुष?
उन्होंने तिरेसिआस को बुलावा भेजा। तीरेसीआस ने ज़ीउस और हीरा के सवाल का एकदम सीधा और सटीक जवाब दिया – “महिलाएं पुरुषों से 9 गुना ज़्यादा सेक्स का आनंद उठती हैं” इस जवाब से हीरा बहुत नाराज़ हो गयीं और उन्होने तीरेसीआस पर ऐसा वॉर किया की वह अंधा हो गया। ज़ीउस अपने आपको तीरेसीआस के अंधेपन के लिए जिम्मेदार मानने लगे और उन्होने उसको भविष्य देखने का वरदान दिया।
लगभग दुनिया की  हर संस्कृति में ऐसे देवी देवता हैं जो स्त्री-पुरुष का सम्बंध खूबसूरती से दर्शाते हैं। भारत में ऐसी प्रतिमा हे अर्धनारीश्वर की।  अर्धनारीश्वर का अर्थ यह हुआ कि आपका ही आधा व्यक्तित्व आपकी पत्नी और आपका ही आधा व्यक्तित्व आपका पति हो जाता है। आपकी ही आधी ऊर्जा स्त्रैण और आधी पुरुष हो जाती है। और तब इन दोनों के बीच जो रस और लीनता पैदा होती है , उस शक्ति का कहीं कोई विसर्जन नहीं होता।